Traducción de los significados del Sagrado Corán - Traducción india de Al-Mujtasar de la Exégesis del Sagrado Corán

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7 : 57

اٰمِنُوْا بِاللّٰهِ وَرَسُوْلِهٖ وَاَنْفِقُوْا مِمَّا جَعَلَكُمْ مُّسْتَخْلَفِیْنَ فِیْهِ ؕ— فَالَّذِیْنَ اٰمَنُوْا مِنْكُمْ وَاَنْفَقُوْا لَهُمْ اَجْرٌ كَبِیْرٌ ۟

अल्लाह पर ईमान लाओ और उसके रसूल पर ईमान लाओ, तथा उस माल में से खर्च करो, जिसका अल्लाह ने तुम्हें उत्तराधिकारी बनाया है, ताकि जो कुछ उसने तुम्हारे लिए निर्धारित किया है उसके अनुसार तुम उसका निपटान करो। फिर तुममें से जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और अल्लाह के रास्ते में अपना धन खर्च किए, उनके लिए उसके पास एक बड़ा प्रतिफल है और वह जन्नत है। info
التفاسير:
Beneficios de los versículos de esta página:
• المال مال الله، والإنسان مُسْتَخْلَف فيه.
• धन अल्लाह का है। इनसान को उसमें उत्तराधिकारी बनाया गया है। info

• تفاوت درجات المؤمنين بحسب السبق إلى الإيمان وأعمال البر.
• ईमान लाने और नेक कार्यों में पहल करने के अनुसार ईमान वालों के दर्जे अलग-अलग होंगे। info

• الإنفاق في سبيل الله سبب في بركة المال ونمائه.
• अल्लाह के रास्ते में खर्च करना धन में बरकत और वृद्धि का कारण है। info