Traducción de los significados del Sagrado Corán - Traducción india de Al-Mujtasar de la Exégesis del Sagrado Corán

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270 : 2

وَمَاۤ اَنْفَقْتُمْ مِّنْ نَّفَقَةٍ اَوْ نَذَرْتُمْ مِّنْ نَّذْرٍ فَاِنَّ اللّٰهَ یَعْلَمُهٗ ؕ— وَمَا لِلظّٰلِمِیْنَ مِنْ اَنْصَارٍ ۟

तुम अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए जो भी थोड़ा हो या बहुत खर्च करो, या तुम अपनी ओर से अल्लाह की आज्ञाकारिता का कोई कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध हो जाओ, जिसके लिए तुम बाध्य नहीं किए गए हो; तो निःसंदेह अल्लाह वह सब जानता है। अतः उसमें से कोई भी चीज़ उसके पास बर्बाद नहीं होगी और वह तुम्हें उसका सबसे बड़ा बदला देगा। तथा उन अत्याचारियों के लिए, जो अपने ऊपर अनिवार्य चीज़ों को रोकने वाले, अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करने वाले हैं, कोई मदद करने वाले नहीं होंगे, जो उनसे क़ियामत के दिन की सज़ा को दूर कर सकें। info
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271 : 2

اِنْ تُبْدُوا الصَّدَقٰتِ فَنِعِمَّا هِیَ ۚ— وَاِنْ تُخْفُوْهَا وَتُؤْتُوْهَا الْفُقَرَآءَ فَهُوَ خَیْرٌ لَّكُمْ ؕ— وَیُكَفِّرُ عَنْكُمْ مِّنْ سَیِّاٰتِكُمْ ؕ— وَاللّٰهُ بِمَا تَعْمَلُوْنَ خَبِیْرٌ ۟

तुम जो कुछ भी दान में धन देते हो, यदि उसे दिखाकर दो तो तुम्हारा यह दान देना अच्छा है, परंतु यदि तमु उसे गुप्त रखते हुए ग़रीबों को दो, तो यह तुम्हारे लिए दिखाने से बेहतर है। क्योंकि यह इख़्लास (निष्ठा) के अधिक निकट है। तथा निष्ठावानों के दान में उनके पापों के लिए एक आवरण और उनके लिए क्षमा है। तथा अल्लाह तुम्हारे कार्यों से अवगत है। अतः तुम्हारी हालतों में से कुछ भी उससे छिपा नहीं है। info
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272 : 2

لَیْسَ عَلَیْكَ هُدٰىهُمْ وَلٰكِنَّ اللّٰهَ یَهْدِیْ مَنْ یَّشَآءُ ؕ— وَمَا تُنْفِقُوْا مِنْ خَیْرٍ فَلِاَنْفُسِكُمْ ؕ— وَمَا تُنْفِقُوْنَ اِلَّا ابْتِغَآءَ وَجْهِ اللّٰهِ ؕ— وَمَا تُنْفِقُوْا مِنْ خَیْرٍ یُّوَفَّ اِلَیْكُمْ وَاَنْتُمْ لَا تُظْلَمُوْنَ ۟

(ऐ नबी!) उन्हें सत्य को स्वीकार करने और उसका पालन करने की हिदायत देना और उन्हें उसपर तत्पर करना आपके ज़िम्मे नहीं है। आपका काम केवल उन्हें सत्य के लिए मार्गदर्शन करना और उन्हें उसके बारे में परिचय देना है। क्योंकि सत्य की तौफ़ीक़ देना और उसकी हिदायत प्रदान करना अल्लाह के हाथ में है। वह जिसे चाहता है, हिदायत प्रदान करता है। तथा तुम जो भी धन खर्च करोगे, उसका लाभ तुम्हारे पास ही आएगा, क्योंकि अल्लाह उससे बेनियाज़ है। और तुम्हारा खर्च केवल अल्लाह के लिए होना चाहिए। क्योंकि सच्चे ईमान वाले केवल अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए ही खर्च करते हैं। तथा तुम जो कुछ भी खर्च करोगे, चाहे थोड़ा या बहुत, तुम्हें उसका भरपूर बदला दिया जाएगा, उसमें कोई कमी नहीं की जाएगी। क्योंकि अल्लाह किसी पर अत्याचार नहीं करता। info
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273 : 2

لِلْفُقَرَآءِ الَّذِیْنَ اُحْصِرُوْا فِیْ سَبِیْلِ اللّٰهِ لَا یَسْتَطِیْعُوْنَ ضَرْبًا فِی الْاَرْضِ ؗ— یَحْسَبُهُمُ الْجَاهِلُ اَغْنِیَآءَ مِنَ التَّعَفُّفِ ۚ— تَعْرِفُهُمْ بِسِیْمٰىهُمْ ۚ— لَا یَسْـَٔلُوْنَ النَّاسَ اِلْحَافًا ؕ— وَمَا تُنْفِقُوْا مِنْ خَیْرٍ فَاِنَّ اللّٰهَ بِهٖ عَلِیْمٌ ۟۠

यह दान उन ग़रीबों को दो, जिन्हें अल्लाह के मार्ग में जिहाद ने आजीविका की तलाश में यात्रा करने से रोक दिया है। उनकी स्थिति से अनभिज्ञ व्यक्ति उन्हें उनके माँगने से बचने के कारण धनवान् समझता है। हालाँकि जो व्यक्ति उनसे परिचित है, वह उन्हें उनके लक्षणों से पहचानता है, क्योंकि उनके शरीर और कपड़ों पर आवश्यकता स्पष्ट दिखाई देती है। उनकी पहचान यह भी है कि वे अन्य ग़रीब लोगों की तरह नहीं हैं, जो लोगों से माँगते हुए उनके पीछे पड़ जाते हैं। तथा तुम अपने धन इत्यादि में से जो कुछ भी ख़र्च करोगे, तो निश्चय अल्लाह उसे भली-भाँति जानता है और वह तुम्हें उसका बहुत बड़ा बदला देगा। info
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274 : 2

اَلَّذِیْنَ یُنْفِقُوْنَ اَمْوَالَهُمْ بِالَّیْلِ وَالنَّهَارِ سِرًّا وَّعَلَانِیَةً فَلَهُمْ اَجْرُهُمْ عِنْدَ رَبِّهِمْ ۚ— وَلَا خَوْفٌ عَلَیْهِمْ وَلَا هُمْ یَحْزَنُوْنَ ۟ؔ

जो लोग रात और दिन, छिपे और खुले, बिना किसी दिखावा और ख्याति के अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए अपना धन खर्च करते हैं, तो उनके लिए उनका प्रतिफल क़ियामत के दिन उनके पालनहार के पास है। उनको अपने भविष्य के बारे में कोई डर नहीं है और न ही वे संसार की छूटी हुई चीज़ों का शोक करेंगे। यह सब अल्लाह की ओर से एक अनुग्रह और कृपा के तौर पर है। info
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Beneficios de los versículos de esta página:
• إذا أخلص المؤمن في نفقاته وصدقاته فلا حرج عليه في إظهارها وإخفائها بحسب المصلحة، وإن كان الإخفاء أعظم أجرًا وثوابًا لأنها أقرب للإخلاص.
• यदि मोमिन बंदा अपने ख़र्च और दान में मुख़्लिस (निष्ठावान) है, तो हित के अनुसार उसे दिखाने और छिपाने में कोई आपत्ति की बात नहीं है। हालाँकि छिपाने में अधिक पुन्य है; क्योंकि वह इख़्लास (निष्ठा) के अधिक निकट है। info

• دعوة المؤمنين إلى الالتفات والعناية بالمحتاجين الذين تمنعهم العفة من إظهار حالهم وسؤال الناس.
• इसमें ईमान वालों से आह्वान किया गया है कि वे ऐसे ज़रूरतमंदों पर ध्यान दें और उनकी देखभाल करें, जिन्हें भिक्षावृत्ति से परहेज़ अपनी स्थिति प्रकट करने और लोगों से माँगने से रोकती है। info

• مشروعية الإنفاق في سبيل الله تعالى في كل وقت وحين، وعظم ثوابها، حيث وعد تعالى عليها بعظيم الأجر في الدنيا والآخرة.
• अल्लाह के मार्ग में हर समय और हर घड़ी खर्च करने की वैधता और उसका महान प्रतिफल, क्येंकि अल्लाह ने इसपर दुनिया और आख़िरत में महान प्रतिफल का वादा किया है। info