Übersetzung der Bedeutungen von dem heiligen Quran - Die Übersetzung in Hindi von Al-Mukhtasar - Eine Kurzfassung der Bedeutungen des edlen Qurans

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21 : 4

وَكَیْفَ تَاْخُذُوْنَهٗ وَقَدْ اَفْضٰی بَعْضُكُمْ اِلٰی بَعْضٍ وَّاَخَذْنَ مِنْكُمْ مِّیْثَاقًا غَلِیْظًا ۟

भला तुम उन्हें दिया हुआ महर कैसे वापस लोगे, जबकि तुम्हारे बीच एक रिश्ता और स्नेह स्थापित हो चुका, तथा तुम एक-दूसरे से लाभान्वित और एक-दूसरे के रहस्यों से अवगत हो चुके हो। इसके बाद उनके हाथों में मौजूद धन की लालच करना बहुत बुरी और घृणित बात है, जबकि वे तुमसे दृढ़ और पक्का वचन (भी) ले चुकी हैं। और वह वचन अल्लाह के शब्द और उसकी शरीयत के द्वारा उन्हें हलाल ठहराना है। info
التفاسير:
Die Nutzen der Versen in dieser Seite:
• إذا دخل الرجل بامرأته فقد ثبت مهرها، ولا يجوز له التعدي عليه أو الطمع فيه، حتى لو أراد فراقها وطلاقها.
• जब पति-पत्नि का मिलन हो जाए, तो महर साबित हो जाता है। अब पति के लिए उसमें दरअंदाज़ी करना या उसकी लालच करना जायज़ नहीं है, भले ही वह उसे छोड़ना और तलाक़ देना चाहता हो। info

• حرم الله تعالى نكاح زوجات الآباء؛ لأنه فاحشة تمقتها العقول الصحيحة والفطر السليمة.
• अल्लाह ने पिताओं की पत्नियों से विवाह करना हराम क़रार दिया है, क्योंकि यह अश्लीलता (निर्लज्जता) का काम है, जिसे सद्बुद्धि और शुद्ध स्वभाव नापसंद करते हैं। info

• بين الله تعالى بيانًا مفصلًا من يحل نكاحه من النساء ومن يحرم، سواء أكان بسبب النسب أو المصاهرة أو الرضاع؛ تعظيمًا لشأن الأعراض، وصيانة لها من الاعتداء.
• अल्लाह ने इस्मतों (सतीत्व) की महिमा बढ़ाते हुए और उन्हें दुरुपयोग से बचाने के लिए, इस बात का विस्तृत विवरण प्रस्तुत कर दिया है कि किन स्त्रियों से निकाह करना जायज़ है और किन से हराम है, चाहे वह वंश (नसब) के कारण हो, या ससुराली रिश्ते की बुनियाद पर, या दूध के रिश्ते (स्तनपान) के आधार पर हो। info