Salin ng mga Kahulugan ng Marangal na Qur'an - Salin sa Wikang Hindi ng Al-Mukhtasar fī Tafsīr Al-Qur’an Al-Karīm

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111 : 4

وَمَنْ یَّكْسِبْ اِثْمًا فَاِنَّمَا یَكْسِبُهٗ عَلٰی نَفْسِهٖ ؕ— وَكَانَ اللّٰهُ عَلِیْمًا حَكِیْمًا ۟

जो व्यक्ति कोई छोटा या बड़ा पाप करता है, तो उसकी सज़ा अकेले उसी पर है, उसके अलावा किसी और पर नहीं। तथा अल्लाह बंदों के कृत्यों को जानने वाला, अपने प्रबंधन और विधान-रचना में हिकमत वाला है। info
التفاسير:
Ilan sa mga Pakinabang ng mga Ayah sa Pahinang Ito:
• النهي عن المدافعة والمخاصمة عن المبطلين؛ لأن ذلك من التعاون على الإثم والعدوان.
• झूठ के अनुयायियों की तरफ़दारी और उनका बचाव करने की मनाही; क्योंकि यह पाप और अतिक्रमण में सहयोग है। info

• ينبغي للمؤمن الحق أن يكون خوفه من الله وتعظيمه والحياء منه فوق كل أحد من الناس.
• सच्चे मोमिन को चाहिए कि उसके दिल में अल्लाह का भय, उसका सम्मान और उससे हया (शर्म) समस्त लोगों से बढ़कर हो। info

• سعة رحمة الله ومغفرته لمن ظلم نفسه، مهما كان ظلمه إذا صدق في توبته، ورجع عن ذنبه.
• अपने ऊपर अत्याचार करने वाले का अत्याचार चाहे जितना बड़ा हो, यदि वह सच्चे दिल से तौबा कर ले और गुनाह से दूरी बना ले, तो उसके लिए अल्लाह की दया और क्षमा अपार है। info

• التحذير من اتهام البريء وقذفه بما لم يكن منه؛ وأنَّ فاعل ذلك قد وقع في أشد الكذب والإثم.
• निर्दोष पर आरोप लगाने और जो उसने नहीं किया उसके साथ उसको लांछित करने के खिलाफ चेतावनी; तथा यह कि ऐसा करने वाला सख़्त झूठ और गुनाह में पड़ जाता है। info