Firo maanaaji al-quraan tedduɗo oo - Eggo e haala Hindi wonande deftere Firo Alkur'aana raɓɓinaango.

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108 : 5

ذٰلِكَ اَدْنٰۤی اَنْ یَّاْتُوْا بِالشَّهَادَةِ عَلٰی وَجْهِهَاۤ اَوْ یَخَافُوْۤا اَنْ تُرَدَّ اَیْمَانٌ بَعْدَ اَیْمَانِهِمْ ؕ— وَاتَّقُوا اللّٰهَ وَاسْمَعُوْا ؕ— وَاللّٰهُ لَا یَهْدِی الْقَوْمَ الْفٰسِقِیْنَ ۟۠

दोनों गवाहों की गवाही में संदेह होने पर उन्हें नमाज़ के बाद क़सम खिलाने और उनकी गवाही को रद्द करने का जो उल्लेख किया गया है, यह इस बात के अधिक क़रीब है कि वे दोनों गवाही का निष्पादन उसके शरई तरीक़े के अनुसार करें। अतः वे गवाही को विकृत न करें या उसमें बदलाव न करें या ख़यानत (विश्वासघात) न करें। तथा यह इस तथ्य के अधिक क़रीब है कि वे इस बात से डरें कि वारिसों की क़सम उन दोनों की क़सम को ख़ारिज कर देगी, चुनाँचे वे लोग उन दोनों की गवाही के विपरीत क़सम खा लेंगे, इस तरह वे दोनों बेनक़ाब हो जाएँगे। गवाही और क़सम में झूठ और ख़यानत (विश्वासघात) को त्यागकर अल्लाह से डरो, तथा तुम्हें जिस बात का आदेश दिया गया है उसे सुनो और स्वीकार करो। और अल्लाह उन लोगों को सामर्थ्य प्रदान नहीं करता, जो उसके आज्ञापालन से निकल जाने वाले हैं। info
التفاسير:
Ina jeyaa e nafoore aayeeje ɗee e ngol hello:
• إذا ألزم العبد نفسه بطاعة الله، وأمر بالمعروف ونهى عن المنكر بحسب طاقته، فلا يضره بعد ذلك ضلال أحد، ولن يُسْأل عن غيره من الناس، وخاصة أهل الضلال منهم.
• जब बंदा अपने आपको अल्लाह के आज्ञापालन के लिए प्रतिबद्ध कर ले, और अपनी क्षमता के अनुसार भलाई का आदेश दे और बुराई से मना करे, तो उसके बाद किसी के गुमराह होने से उसका कोई नुक़सान नहीं होगा, तथा उससे अन्य लोगों के बारे में हरगिज़ पूछताछ नहीं की जाएगी, खासकर उन लोगों के बारे में जो उनमें से गुमराह हैं। info

• الترغيب في كتابة الوصية، مع صيانتها بإشهاد العدول عليها.
• वसीयत के लिखने के लिए प्रोत्साहन, साथ ही उसपर न्यायप्रिय लोगों को गवाह बनाकर उसका संरक्षण करना। info

• بيان الصورة الشرعية لسؤال الشهود عن الوصية.
• वसीयत के बारे में गवाहों से पूछने के लिए शरई रूप का वर्णन। info